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घण्टो यूट्यूब देखने की आदत कैसे रोकें ? Stop Binge Watching Youtube (HINDI INFOGRAPHICS) HINDI TEXT

घण्टो यूट्यूब देखने की आदत कैसे रोकें ?




इन्टरनेट सस्ता और हर किसी के हाथ में आने के बाद काफी चीजे अच्छी हुई . इस इन्टरनेट का बहुत लोगोंने अच्छा इस्तेमाल किया. लेकिन कुछ चीजे इस इन्टरनेट से बढ़ गई .
उस में से एक है यु ट्यूब  का आत्यंतिक इस्तेमाल .
बहुत सरे लोगोंने यु तुबे के माध्यम से नए उद्योग चालू किए , नए नए टुटोरिअल देख कर अपना नॉलेज बढाया . लेकिन कुछ लोगोंने ईस यु ट्यूब का इस्तेमाल अपने मन को रिझाने के लिए , वक्त काटने के लिए करना चालु किया. वक्त काटते काटते कई बार अपने रोज की जिंदगी पर भी इसका असर पड़ने लगा .
अपने जीवन का एक एक पल कितना बहुमूल्य है यह हम कई बार भूल जाते है .
इसलिए ये कुछ सवाल है जो अपने आप से पुछना जरुरी हो गया है .
शायद ये सवाल आपको अंतर्मुख कर दें . आपको अपने खुदके तरफ ध्यान देने के लिए मजबूर कर दें.

1. मै समय क्यों वेस्ट कर रहा हूँ ?  क्या हमारे मन में कोई ऐसी चीज है जिससे हरारे मन में दुःख पैदा होता है . उस दर्द को देखना हमें मुश्किल लगता है . इसलिए मन को किसी चीज में उलझा के रखने से हमें रहत मिलाती है .  यह आजकल बहुत सामन्य रूप से दिखने वाला कारण है , मन को यू ट्…

स्क्रिप्टोफोबिया/ ग्राफोफोबिया - लोगों के सामने लिखने का डर (HINDI)

लोगों के सामने लिखने का डर SCRIPTOPHOBIA/ GRAPHOPHOBIA
क्या होता है ग्राफोफोबिया? जब किसीको लोगों के उपस्थिति में , या अगर कोई इन्सान हमें देख रहा होता है तब लिखने के लिए डर लगता है . हमारी कोई गलती हो जाएगी , सब लोग हसेंगे , या चेक पर हस्ताक्षर गलत बनेगा और चेक पास नहीं होगा ऐसा डर लगता है तब वह व्यक्ति ऐसी परिस्थिति टालने लगता है . इस बर्ताव के लक्षणों को ग्राफोफोबिया कहते है .

स्किज़ोफ्रेनिया विस्तृत जानकारी (हिंदी) - NEW WEBSITE

स्किज़ोफ्रेनिआ
SCHIZOPHRENIA
परिचय :---

INTRODUCTION :---
स्किज़ोफ्रेनिआ एक ऐसा रोग है जो मनुष्य के विचार, अनुभूति और व्यवहार पर गंभीर असर करता है |
मरीज के लिए वास्तविक और काल्पनिक अनुभवों मे फर्क करना कठिन हो जाता है |
मरीज के लिए तार्किक रूप से सोचना, सामान्य भावनाओं को व्यक्त करना और समाज मे उचित व्यवहार करना कठिन हो जाता है |
मरीज काल्पनिक विचारों की आंतरिक ज़िन्दगी मे जीता है एवं बाहरी दुनिया से अलग-थलग रहता है |
मरीज के कामकाज के तरीके एवं एकाग्रता दोनों पर असर पड़ता है |
व्यापकता :---
PREVALENCE :---
स्किज़ोफ्रेनिआ का वर्णन प्राचीन चिकित्सा एवं आयुर्वेदिक ग्रंथो मे भी है |
स्किज़ोफ्रेनिआ सारी दुनिया मे फैला हुआ है |
स्किज़ोफ्रेनिआ मुश्किल से पाये जाने वाला रोग नहीं है | यह एक आम रोग है और समाज के प्रत्येक १०० मे से १ व्यक्ति को कभी न कभी अपने जीवनकाल मे स्किज़ोफ्रेनिआ  हो सकता है  |
भारत मे १ करोड़ से ज्यादा लोग इस बीमारी से पीड़ित है |
किस को हो सकता है ?
WHO GETS AFFECTED?
यह युवा और वयस्कों की बीमारी है |लेकिन कभी कभी छोटे बच्चों में भी ये बिमारी देखा जाता है |
पुरुष एवं महिला दोनो…

परीक्षा कैसे दे ? : भाग 1 पहले आत्मविश्वास ....या पहले मेहनत ?

कई बार देखा जाता है की कुछ छात्र अत्यंत आत्मविश्वास से भरे रहते है । उनमें से कुछ छात्रोंकी परीक्षा की तैयारी भी अधूरी रहती है । फिर भी भरपूर आत्मविश्वास रहता है ।
और कुछ जगह  उससे एकदम उलटा देखा जाता है ।

Trichotillomania (Hair-Pulling Disorder) बाल तोड़ने का बिमारी

MIGRAINE HEADACHE - THINGS TO AVOID

MIGRAINE HEADACHE - THINGS TO AVOID 
Migraine headache has many trigger factors . These should be avoided so that episodes are limited.

Major Depressive Disorder ( उदासिनता नैराश्य बिमारी )

                                                                  Major Depressive Disorder


Diagnostic Criteria A.Five (or more) of the following symptoms have been present during the same 2-week period and represent a change from previous functioning; at least one of the symptoms is either (1)Depressed mood or (मन उदास रहना) (2)Loss of interest or pleasure. (किसी चीज़ में उत्साह / आनंद न आना)

Bipolar Mood Disorder Mania introduction मेनिया हिंदी

BIPOLAR I DISORDER
DIAGNOSTIC CRITERIA :
For a diagnosis of bipolar I disorder, it is necessary to meet the following criteria for a manic episode. The manic episode may have been preceded by and may be followed by hypomanic or major depressive episodes.
MANIC EPISODE :

A distinct period of abnormally and persistently elevated, expansive, or irritable mood and abnormally and persistently increased goal-directed activity or energy,

DEMENTIA , MEMORY LOSS DISORDER, CAREGIVER'S GUIDE IN HINDI . डिमेन्शिया , भुलने की बिमारी , कैसे बर्ताव करें , विस्तृत जानकारी

डिमेन्शिया / बुढ़ापे में भूलने की बिमारी :--- १.व्यक्ति पृष्ठभूमि परिचय तथा जीवन समीक्षा डिमेन्शिया से व्यक्ति की दीर्घकालीन एवं लघुकालीन दोनों प्रकार की स्मरणशक्ति ही प्रवावित होती है अत: डिमेन्शिया से पीड़ित व्यक्ति की देखभाल करने वाला परिवार का व्यक्ति उसकी व्यक्तिगत स्मृतियों को एक सुव्यवस्थित तरीके से एकत्रित करके तथा जानकारी के आंकड़ों को जुटा कर उल्लेखनीय मदद कर सकता है | परिवार का देखभालकर्ता ऐसे व्यक्ति को जानकारी को खोजने, फोटो तथा अन्य संबंधित वस्तुओं को ढूढ़ने आदि में मदद कर सकता है | ऐसी चीजें अगर भिन्न – भिन्न घटनाओं तथा भिन्न – भिन्न समय अवधियों का प्रतिनिधित्व करे, तो अच्छा होगा |

ओब्सेसिव कमपल्सिव डिसऑर्डर OBSESSIVE COMPULSIVE DISORDER , o.c.d. IN MARATHI

“ओ. सी. डी.”OBSESSIVE COMPULSIVE DISORDER कल्पना – क्रिया अनिवार्यता विकार :



कल्पना – क्रिया अनिवार्यता विकार म्हणजे काय ? ऑबसेसिव्ह – कंपल्सिव्ह डिसऑर्डर (ओसीडी) म्हणजे एक प्रकारचा चिंतेचा विकार असतो. याने बाधित झालेल्या वयाक्तिच्या मनात नियंत्रण न ठेवता येण्याजोगे आणि नको ते विचार येऊ लागतात. हे विचार परत परत येताच राहतात आणि त्या संबंधित क्रिया वारंवार करण्याची प्रबळ ईच्छा मनात दाटून येते . हे विचार मानवाला बेचैन करून टाकतात . विचार काढन्याचा प्रयत्न केला तरी विचार येतच राहतात . उदाहरण १ : विचार हाताला काही तरी घान लागलेली आहे असे वाटणे .जर हात नाही धुतला तर काही तरी भयंकर इन्फेक्शन होइल अशी भीती वाटने . क्रिया हात स्वच्छ असण्याची खातरजमा करण्यासाठी हात पुनःपुन्हा धुणे,

मानसिक तकलीफों में दवाई कैसे काम करती है ।

“ विचारों की तकलीफ पर दवाई कैसे असर करती है ? “ यह सर्वसाधारणत: मनमें उठने वाला प्रश्न है की “ तकलीफ तो मन की है ; विचारों की है | उसमें दवाई का क्या काम हो सकता है | दवाई तो एक रसायन मात्र है | “ कई संशोधनों के बाद मानसिक विज्ञान शास्त्रज्ञो को पता चला की मन के अंदर विविध प्रकार के रसायन अर्थात न्यूरो ट्रान्समीटरर्स (Neuro- Transmitters) होते है जो विविध विचार, भाव भावनाओं, बरताव ईनके ऊपर कार्य करते है | मस्तिक में अनेक विविध भागों में अनेक खास कार्य निर्धारित किये हुए होते है | मस्तिक में चलने – बोलने का अलग अलग केंद्र होता है वैसे ही विचारों और भाव – भावनाओं के भी अनेक विशेष केंद्र होते है | जब कभी किसी इंसान के जीवन में तनाव बढ़ जाता है ; तब मस्तिक में तनाव के रसायन (Stress-Harmones) निर्माण होते है | जब ये तनाव – रसायन ज्यादा दिनों तक मस्तिक के बढे रहते है तब वे मस्तिक के भाव (Emotion) वाले केंद्र पर कार्य करने लगते है | ईनके कार्य की वजह से ; मस्तिक के उदासीनता (Depression) पैदा करने वाले केंद्र सक्रिय (Activate) होने के वजह से इंसान उदास रहने लगता है | कुछ काम में ; खाने पीने मे…

मानसिक दवाईयाँ : गलतफहमियाँ

मानसिकतकलिफो के उपचार के बारे में गलत फहमियाँ
(MYTH ABOUT PSYCHIATRIC MEDICATIONS)
“ * मनोसोपचार तज्ञ सिर्फ नींद की गोलियां ही देते है “
सालोंसे यह एक सर्वसामान्य तौर पर लोगों में गलतफहमि बैठ गई है की “ मनोसोपचारतज्ञ (PSYCHIATRIST) सिर्फ नींद की गोली ही देते है | उनसे इंसान पूरा वक्त सोते रहता है | सोते रहने से वह इंसान किसी काम का नहीं रह जाता |”
ईस विचार धारणा निर्माण होने के पीछे कुछ कारण जरुर है | सालों पेहले वैद्यकिय विज्ञान  (medical science) में शोध हुए ; तब विविध मानसिक तकलीफों के लिए जो दवाईयाँ शोध कर के (Research) उपलब्ध की गयी उनमें बिमारियों को ठीक करने के साथ साथ नींद का आड असर / साईड इफ़ेक्ट भी होता था |
ईस वजह से मरीज दवा चालू करने के बाद नींद में रहता था |
लेकिन वो दस – पंधरहा साल पहले की बात है |
आजकल जो नई दवाईयाँ विज्ञानने संशोधन करके निर्माण की है उनमें ईस तरह के साईड इफेक्ट्स नहीं रहतें |
नई दवाईयाँ चालू करने के बाद मरीज की मानसिक तकलीफे धीरे धीरे कम होती जाती है और वह व्यक्ती किसी और आम ईंसान की तरह रोज का काम कर सकता है | चाहें वो घर का काम हो या बाहर का या बोद्ध…

मानसिक तकलीफे

मानसिक व्याधियों का वर्गीकरण
आज कल जिंदगी तनाव और भागा-दौड़ी की वजह से कई सारी मानसिक तकलीफे आम तौर पे लोगों को सहेन  करनी पड़ रही है |
मन मे तनाव ( emotional stress ) पैदा होना अत्यंत सर्व सामान्य बात हो गई है, लेकिन हमें उस तनाव से बाहर निकलना सीखना अत्यतं जरुरी है| अन्यथा ये हीं तनाव आगे बढ़कर मानसिक व्याधीओं के निर्माण होने का कारण बन जाती  है |
मन की व्याधियां विविध प्रकार की होती है | हर व्याधि या तकलीफ की वजह अलग होती है |
मानसिक तकलीफे होने के कारण :
व्यक्ति का मस्तिष्क , मज्जातंतु (neurons), रासायनिक रचना ( chemical makeup ) , व्यक्तिमत्व , तनाव सहने की क्षमता , वातावरण तनाव , इत्यादि विविध घटकों के ऊपर विविध मानसिक समस्यांए निर्माण होनेकी  शक्यता  होती है |
वर्गीकरण :
मन की तकलीफों को व्याधिओं को दो प्रकारों में विभाजित कर सकते है :
न्युरोसिस (neurosis) [मानसिक क्लेश]
सयकोसिस (psychosis) [मनोविकृति]
Neurosis (मानसिक क्लेश) और psychosis (मनोविकृति) इन दोनों में कुछ प्रमुख फर्क है /
मानसिक क्लेश (neurosis)व्यक्ती को पता चलता है की उसके विचारों मे और बर्ताव मे कुछ अनचाहा बदलाव आ …

मानसिक बिमारी : वर्गीकरण